उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिए गए निर्णय के कारण बीयू के छात्रों को स्नातक की मेरिट में हो सकता है नुकसान



भोपाल । बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में कोरोना कर्फ़्यू लगने से पहले ही, स्नातक कोर्स के 90 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की प्रायोगिक परीक्षाएं पारंपरिक पद्धति से हो चुकी हैं। इसके बाद हाल ही में राज्य शासन ने कहा है कि प्रायोगिक परीक्षाएं ओपन बुक सिस्टम के आधार पर होंगी। ऐसे में बीयू के छात्र-छात्राएं अशंका जता रहे हैं कि उनकी मेरिट अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों की तुलना में खराब हो सकती है। इसका नुकसान उन्हें स्नातकोत्तर में एडमिशन के लिए बनने वाली स्नातक की मेरिट में हो सकता है।

सैद्धांतिक प्रायोगिक परीक्षा में सख़्ती होती है और ओपन बुक सिस्टम में उन्हें खुली किताब से देखकर उत्तरलिखने का अवसर मिलता है। राज्य शासन ने वायवा के लिए ऑनलाइन व्यवस्था करने के निर्देश भी नहीं दिए हैं। इसलिए बीयू के छात्र-छात्राओं मार्किंग कम और अन्य छात्रों जो जिनकी प्रायोगिक परीक्षाएं ओपन बुक सिस्टम से होंगी उन्हें अधिक अंक मिलने की संभावना है।

दो अलग-अलग पद्धति से मूल्यांकन...

कोरोना संक्रमण के कारण छात्रों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिए गए निर्णय के कारण अलग-अलग विश्वविद्यालयों के अलावा एक ही विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं के प्रैक्टिकल ज्ञान का मूल्यांकन दो पद्धतियों से होगा। बीयू में ही जो कॉलेज समय पर प्रायोगिक परीक्षा नहीं करा सके उनके छात्र ओपन बुक सिस्टम से परीक्षा देंगे। इसलिए परीक्षा दे चुके छात्र-छात्राओं की अशंका को कुछ हद तक शिक्षक भी सही ठहरा रहे हैं। क्योंकि पारंपरिक तरीके से होने वाली प्रायोगिक परीक्षा में विद्यार्थियों के सभी पक्षों का मूल्यांकन हो जाता है।

बीयू के कुलपति प्रो.आरजे राव ने कहा कि ,'इस संबंध में फिलहाल मेेरे पास जानकारी नहीं है। जानकारी प्राप्त कर इस विषय में विचार करेंगे।'

वही रजिस्ट्रार डॉ. एचएस त्रिपाठी का कहना है कि ' यह सही है कि बीयू की करीब 90 प्रतिशत छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा पूर्व में ही हो चुकी हैं। कोरोना संक्रमण के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है। इससे बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ेगा।'

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