यूआईटी आरजी पीवी में चल रहा है पांच दिवसीय अटल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम ; अर्टिफिेशअल इंटेलिजेंस , रोबोटिक्स आदि विषयों पर हुई चर्चा

यूआईटी आरजीपीवी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित अटल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तीसरे दिन के सत्र बेहद ज्ञानवर्दक रहे | तीसरे दिन के पहले सत्र में अर्टिफिेशअल इंटेलिजेंस एवं उसके आधुनिकरण के रोबोटिक्स में महत्व जैसे प्रचलित विषय पर शोध किया गया| इस सत्र में डॉ राजेश डोरिया ने अपने ज्ञान को सभी प्रतियोगियों के साथ साझा किया एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रमाणिकता की नीव रखी | डॉ  डोरिया वर्त्तमान में एनआईटी रायपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर की पदवी पर कार्यरत हैं| रोबोटिक्स के क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली कई तकनीकें जैसे मशीन लर्निंग , डीप लर्निंग  एवं आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की जानकारी देते हुए उन्होंने इनके बीच का अंतर समझाया | उन्होंने इस सत्र में कई आधुनिक रोबोट्स के चित्र एवं वीडियो क्लिप्स साझा की जिसमे मिस्टर रोबोट एवं नैनोबोट शामिल थे | कोरोना महामारी में कैसे मिस्टर रोबोट की मदद से डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज करने में मदद प्राप्त की इसकी जानकारी भी डोरिया जी ने एक वीडियो के द्वारा दी |  
उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषय जैसे क्लाउड रोबोटिक्स , रोबोट ऑपरेटिंग सिस्टम , वेबबोट्स के बारे में रोचक जानकारिया प्रदान की| रोबोटिक्स को भविष्य में बोहोत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए उन्होंने अपने सत्र का समापन किया |
 
वहीं तीसरे दिन के दुसरे सत्र का आरम्भ डॉ विजय भास्कर सेमवाल द्वारा किया गया | दुसरे सत्र का विषय स्पेशियल ट्रांसफॉर्मेशन एवं इनवर्स कायनेमेटिकस सलूशन रहा| इस सत्र में विजय भास्कर सेमवाल जी ने कई महत्वपूर्ण जानकारिया दी जो की काफी पेचीदा मानी जाती हो क्युकी इसमें कायनेमेटिकस जैसे कठिन विषय का इस्तेमाल किया जाता है | रोबोटिक्स के क्षेत्र में कायनेमेटिकस का उपयोग तकनिकी रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है| उन्होंने में अपने सत्र में बताया की हुमानोइड रोबोट्स को बनाने एवं उनकी कार्यशैली को पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए इनवर्स कायनेमेटिकस का इस्तेमाल अनिवार्य है |
उन्होंने इस सत्र में रोबोटिक्स में इस्तेमाल किये जाने वाले स्पेशियल अरेंजमेंट का विवरण दिया एवं तकनिकी रूप से इनका प्रयोग कैसे किया जाता है यह भी चल चित्रों के माध्यम से दिखाया | अन्य महत्वपूर्ण विषयो जैसे यूलर एंगल , रिजिड बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन एवं कायनेमेटिकस में पाई जाने वाली परेशानियों के बारे में गहन विचार विमर्श किया गया |
 
तीसरे दिन का अंतिम सत्र ध्यान एवं योग से जुड़ा रहा| सहज योग बेंगलुरु , कर्नाटका का प्रतिनिधितव करते हुए श्री चंद्रकांत देओड़ा ने योग एवं ध्यान के ऊपर प्रकाश डाला| सहज योग का संस्थापन आदरणीय डॉ निर्मला श्रीवास्तव द्वारा किया गया । इस सत्र में चंद्रकांत देवड़ा ने प्रतियोगियों से वार्ता करते हुए योग एवं ध्यान का अर्थ सरल शब्दों में साझा किया| उनके अनुसार ध्यान का अर्थ मन में चलते अलग अलग विचार एवं भावना के बीच की डोर को बांधने वाली प्रक्रिया को कहा जाता है जिससे मन को शांति मिलती है एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार पूरे शरीर में होने लगता है | उन्होंने सहज योग के कई फायदे बताये जिसमे स्वयं ही अपनी परेशानी जान्ने की क्षमता प्राप्त होती है और उसका इलाज ध्यान व् योग से किया जा सकता है , इसका वैगयानिक रूप से पुष्टिकरण किया जा चुका है और ये स्वतः ही किये जाने वाला माध्यम है जिसकी वजह से यह और भी सरल एवं उपयोगी साबित होता है | इसके बाद उन्होंने प्रतिभागियों को ऑनलाइन योग सिखाया एवं उन्हें लाइव ध्यान करवाया |

प्रोफेसर उदय चौरसिया  कोऑर्डिनेटर फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम ने बताया  एडवांस रोबोटिक एंड कंट्रोल एआईसीटीई अटल द्वारा प्रायोजित फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तीसरे दिन बताया की भागदौड़ की दुनिया में हर एक व्यक्ति काफी तनाव में रहता है इसलिए तीसरे दिन के आखरी सेशन में सहज योगा का 2 घंटे का सेशन रखा गया जिसमें मेडिटेशन द्वारा कैसे तनावमुक्त रहा जा सके, आज विशेष तौर पर पहले सेशन में डॉ राजेश डोरिया  नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर ने विभिन्न प्रकार के रोबोट के बारे में बताया जैसे कि सॉफ्ट रॉबर्ट, सर्विस रोबोट, नैनो बोट्स और बोस्टन डायनॉमिक्स के बारे में विस्तार पूर्वक बताया एवं एमएनआईटी भोपाल के प्रोफेसर डॉ विजय भास्कर सहनेवाल द्वारा रोबोटिक का उपयोग चिकित्सालय में कैसे किया जा सकता है इसका विस्तार से बताया गया।

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