'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' पर वर्चुअल एम्पलाईमेंट कॉन्क्लेव का हुआ समापन , विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

भोपाल। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने 12 अगस्त को 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' पर वर्चुअल एम्पलाईमेंट कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज की जरूरत है और ऐसी मानसिकता विकसित करना आवश्यक है। कोविड ने हम सभी को डिजिटल होने पर मजबूर किया है। हमें तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवाओं में इस सोच को विकसित करना होगा कि वे मात्र पाठ्यक्रम के विषयों पर केन्द्रित न रहकर आधुनिकतम तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी से भी पूर्ण रूप से वाकिफ़ हो। युवा समस्याओं के निराकरण की जानकारी के अतिरिक्त इस बात के लिए भी अपने आप को तैयार करें कि इसका क्रियान्वयन कैसे और कहाँ किया जा सकता है।

सिंधिया ने कहा कि मध्यप्रदेश ने डिजिटल स्किलिंग को अपने एजेंडें में प्रमुख स्थान दिया गया है। हम इस पर पिछले कुछ महीनों से एक्शन प्लान बनाकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है। शैक्षणिक संस्थानों में सैद्धांतिक ज्ञान से ज्यादा व्यवहारिक पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए। हमने एक नया प्रयोग किया था, जिसमें हमारे लगभग 40 हजार बच्चों ने माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के माध्यम से ए.आई. कोर्स की जानकारी से रू-ब-रू हुए थे। सिंधिया ने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग ने कॉगनीजे़न्ट, इनफोसिस, परसिसटेंट, केपेमिनी जैसी देश की प्रतिष्ठित कम्पनियों के साथ मिलकर प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सॅवारने के लिए नित नए प्रयोग कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, नैसकॉम, इन्फोसिस के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित वर्चअत कान्वलेव के विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए।
   
परसिसटेंट सिस्टम के एम.डी.  डा.आनन्द देशपाण्डे ने कहा कि कोरोना ने आजीविका पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। परन्तु इस डिजिटाइजेशन ने प्रौद्यागिकी की मदद की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वॉर फार टेलेंट में बढ़ोत्तरी हुई है। नई कम्पनियाँ सर्वोत्तम प्रतिभा की खोज में हैं। अपने विषयों के अलावा शार्ट टर्म कोर्सस अपना कर नई दिशा में कार्य किया जा सकता है।

CISCO के एम.डी.  हरीश कृष्णन ने कहा कि कोविड व्यवधान ने हमें कहीं से भी किसी भी समय काम करने के नए आयाम दिखाए हैं। यह चलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही CISCO युवाओं के लिए साइबर सेक्युरिटी स्पोकन इंग्लिश आदि पर पाठ्यक्रम शुरू करेगा। 

कॉगनीज़ेंट की वाइस प्रेसिडेंट माया श्रीकुमार ने जानकारी साझा की, कि किस तरह से शैक्षणिक उद्योगों के लिए प्रतिभाओं को निखार सकती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से समस्याओं को समझना और उनकी पहचान करना आना आवश्यक है। यह हुनर उन्हें भविष्य में सफलता दिलायेगा। पाठ्यक्रम के विषयों को कम कर कौशल व्यवहारिक ज्ञान में वद्धि करें।

कैपजमीनी की निदेशक तेजीन्दर सेठी ने कहा कि डिविटाइजेशन हर रोज नये रूप में आ रहा है। किराने की दुकान में भी अब डिजिटल पेमेन्ट होता है। सब लोग डिजिटली ट्रांसफार्म हो रहे है। उन्होनें कहा कि इसका नकारात्मक प्रभाव भी है। डाटा सुरक्षा, साइबर क्राइम जैसे धोखे से आम आदमी अब परिचित हो रहा है। इसके लिए साइबर सेक्यूरिटी, क्लाउड सेक्यूरिटी स्किलस भविष्य की जरूरत है। हमें इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा युवाओं की जरूरत है।

कॉन्क्लेव में परसिसटेंट के समीर बेन्द्रे, इनफोसिस के सुधीर मिश्रा, CISCO की  मार्सेला-ओ-शिया, सेलफोर्स के  विलियम सिम, माइक्रोसाफ्ट की इंद्राणी चौधरी ने भी अपने सुझाव दिए। इस अवसर पर सचिव तकनीकी शिक्षा  मुकेश चन्द्र गुप्ता तथा सीआईआई यंग इंडियन्स के डॉ. अनुज गर्ग उपस्थित थे।

menu
menu